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श्रीमद्भगवद्गीता • दिव्य संवाद
जीवन के हर प्रश्न का उत्तर — गीता के ज्ञान से
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
— अध्याय २, श्लोक ४७
हे पार्थ, अपने मन की बात पूछो — जीवन, कर्म, धर्म अथवा किसी भी उलझन के विषय में। गीता का ज्ञान तुम्हारे हर प्रश्न का मार्ग दिखाएगा।