HomeBlogsGita 6.17

क्या आपकी थकान का कारण सिर्फ काम है? संतुलन की कला

अत्यधिक काम और भागदौड़ के बीच हम खुद को भूल जाते हैं। जानिए गीता के अनुसार संतुलन का असली मंत्र।

📖 भगवद गीता अध्याय 6.17 02 July 2026
Read in English ↗
युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु । युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ॥
— भगवद गीता 6.17

क्या हम अपनी ही रफ्तार के शिकार हैं?

सुबह का अलार्म बजते ही दिल की धड़कन बढ़ जाती है। लैपटॉप खुलते ही ईमेल की बाढ़, फिर घर की जिम्मेदारियां, और रात को फोन पर बिना मतलब की स्क्रॉलिंग। हमें लगता है कि हम 'प्रोडक्टिव' (productive) हो रहे हैं, लेकिन क्या सच में? असल में, हम बस घिस रहे हैं। हम थकते हैं, चिड़चिड़े होते हैं, और फिर रात को नींद की गोलियां ढूंढते हैं। क्या जीवन बस इसी भागदौड़ का नाम है?

अति किसी भी चीज़ की हो, वो जहर है

समस्या यह नहीं है कि हम काम कर रहे हैं। समस्या यह है कि हम 'अति' (excess) में जी रहे हैं। या तो हम काम में डूब जाते हैं कि सेहत भूल जाते हैं, या फिर इतने सुस्त हो जाते हैं कि आलस घेर लेता है। कृष्ण यहाँ हमें उस 'बीच के रास्ते' की याद दिला रहे हैं।

युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु । युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ॥

इसका सीधा सा मतलब है: जो खाने-पीने, मनोरंजन, काम और सोने-जागने में 'युक्त' यानी संतुलित है, उसके लिए योग दुखों को मिटाने वाला बन जाता है।

तीन दृष्टिकोण: एक समाधान

स्वामी मुकुंदानंद जी: वे कहते हैं कि हमारा मन एक मशीन की तरह है। अगर आप इसे 24 घंटे चलाएंगे, तो यह 'बर्नआउट' (burnout) हो जाएगा। संतुलन का मतलब सिर्फ समय का प्रबंधन नहीं है, बल्कि अपनी मानसिक ऊर्जा को बचाना है।

श्रील प्रभुपाद: वे समझाते हैं कि जीवन का उद्देश्य ईश्वर की सेवा है। लेकिन अगर हम शरीर को ही नष्ट कर लेंगे, तो सेवा कैसे करेंगे? शरीर एक साधन है, इसलिए इसे सही ईंधन और सही आराम देना भी एक भक्ति है।

स्वामी रामसुखदास जी: उनका कहना है कि 'युक्त' का अर्थ है - आवश्यकता के अनुसार। न कम, न ज्यादा। जब हम अपनी इच्छाओं को अनुशासन में लाते हैं, तो जीवन अपने आप सुव्यवस्थित हो जाता है और दुख अपने आप कम होने लगते हैं।

आधुनिक जीवन में इसका मतलब

इसका मतलब ये नहीं कि आप साधु बन जाएं। इसका मतलब है 'स्मार्ट' जीवन। अगर आप ऑफिस में 12 घंटे बैठ रहे हैं लेकिन अपनी सेहत खराब कर रहे हैं, तो वो 'युक्त' नहीं है। अगर आप हर रात ओटीटी (OTT) देख रहे हैं और सुबह उठने में संघर्ष कर रहे हैं, तो वो भी 'युक्त' नहीं है।

एक छोटा उदाहरण: मान लीजिए आप एक प्रोजेक्ट के लिए बहुत तनाव में हैं। आपने खाना छोड़ दिया और रात भर जागे। क्या आप बेहतर काम कर पाएंगे? नहीं। कृष्ण कहते हैं, थोड़ा सोइए, थोड़ा खाइए, फिर काम कीजिए। आपकी 'एफिशिएंसी' (efficiency) बढ़ जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या इसका मतलब है कि मैं अपने सपने छोड़ दूं? बिल्कुल नहीं। कृष्ण कर्म छोड़ने को नहीं, बल्कि कर्म के प्रति जागरूक होने को कह रहे हैं।

मैं संतुलन कैसे बनाऊं? छोटे कदम उठाएं। जैसे- तय समय पर डिनर करना, या रात को फोन को दूर रखकर सोना। यह छोटा सा अनुशासन ही योग की शुरुआत है।

खुद से एक सवाल पूछिए

आज रात जब आप सोने जाएं, तो खुद से पूछें: क्या मैंने आज अपने शरीर और मन के साथ न्याय किया, या मैंने बस इसे घिसने के लिए मजबूर किया?

📖 यह भी पढ़ें: तनाव को कैसे हराएं?
गीतातनावअनुशासनमानसिक शांतिजीवन शैली

इस लेख को शेयर करें