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पंचांग भेद

भारत के विभिन्न क्षेत्रीय पंचांग — हर एक की अपनी गणना पद्धति और परंपरा

தமிழ்
तमिल पंचांग
सूर्य सिद्धांत पर आधारित। तमिलनाडु में प्रचलित। मास का आरंभ सूर्य संक्रांति से होता है। इसमें 'नल्ल नेरम' और 'गौरी पंचांग' का विशेष महत्व है।
বাংলা
बंगाली पंजिका
बंगाल और पूर्वोत्तर में प्रचलित। सूर्य सिद्धांत पर आधारित। विवाह, गृह प्रवेश आदि मुहूर्तों के लिए बंगाली पंजिका का विशेष महत्व है।
മലയാളം
मलयालम पंचांग
केरल में प्रचलित। सौर मास पर आधारित। उग्र/शुभ नक्षत्रों का महत्व। मलयालम पंचांग में 'अमृत घड़ी' और 'वार' की विशेष गणना।
मराठी
मराठी पंचांग
महाराष्ट्र में प्रचलित। अमांत और पूर्णिमांत दोनों पद्धतियाँ। शुक्रवार और मंगलवार के विशेष मुहूर्त। 'पंचक काल' की गणना।
ગુજરાતી
गुजराती पंचांग
गुजरात में प्रचलित। पूर्णिमांत पद्धति। व्यापारिक मुहूर्त, 'चौघड़िया' और 'राहु काल' का अधिक प्रचलन।
ಕನ್ನಡ
कन्नड़ पंचांग
कर्नाटक में प्रचलित। तमिल और तेलुगु पंचांगों से मिलती-जुलती पद्धति। 'गौरी पंचांग' और 'अमृत घड़ी' के लिए प्रसिद्ध।
తెలుగు
तेलुगु पंचांग
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में प्रचलित। उगादि से नव वर्ष। वैखानस और श्रीवैष्णव खंडों में विशेष पंचांग।
ଓଡ଼ିଆ
उड़िया पंजी
ओडिशा में प्रचलित। मंदिरों की पूजा पद्धति के अनुसार विशेष गणना। पुरी जगन्नाथ मंदिर का पंचांग सबसे प्रसिद्ध।
नेपाली
नेपाली पात्रो
नेपाल में प्रचलित। विक्रम संवत पर आधारित। पूर्णिमांत पद्धति। दशाई और तिहार जैसे पर्वों की विशेष गणना।
ISKCON
ISKCON पंचांग
गौड़ीय वैष्णव परंपरा पर आधारित। पूर्णिमांत पद्धति। विशेष एकादशी व्रत, निताई-गौरांग और श्रील प्रभुपाद से संबंधित पर्व।
हर क्षेत्रीय पंचांग की अपनी गणना पद्धति और परंपरा है। यह पृष्ठ केवल सूचनात्मक है। विस्तृत गणना आपके स्थानीय पंचांग से देखी जा सकती है।